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सुहानी रात ढल चुकी

| | Wednesday, November 11, 2009
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सुहानी रात ढल चुकी, ना जाने तुम कब आओगे
जहाँ की रुत बदल चूकी, ना जाने तुम कब आओगे
नज़ारे अपनी मस्तियाँ, दिखा दिखा के सो गये
सितारे अपनी रोशनी लूटा लूटा के सो गये
हर एक शम्मा जल चूकी, ना जाने तुम कब आओगे
तड़प रहे हैं हम यहा, तुम्हारे इंतजार मे
फ़िजा का रंग आ चला हैं मौसम-ए-बहार मे
हवा भी रुख बदल चूकी, ना जाने तुम कब आओगे



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Jo Dar Gaya Samjo Mar gaya.